आध्यात्मिक विकास के लिए ध्यानाभ्यास
जीवन के उद्देश्य का ज्ञान और परिपूर्णता की प्राप्ति
इस तकनीकी युग में जीवन की भाग-दौड़ और तनावों से घबराकर, अक्सर कई लोग सोचने लगते हैं कि आख़िर उनके जीवन का उद्देश्य क्या है। क्या आपने भी कभी रुककर इन सवालों के बारे में सोचा हैः मैं कौन हूँ, मैं यहाँ क्यों हूँ, मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है, और मुझे परिपूर्णता कैसे मिल सकती है?
इन सवालों के बारे में सोचने के लिए कई लोग मौन अवस्था में बैठकर ध्यान टिकाते हैं। ध्यानाभ्यास में समय बिताने से हमारे लिए जवाबों को पाने का द्वार खुल जाता है।
सही समझ आ जाने से ज्ञान-विवेक में बढ़ोतरी
तकनीकी विकास के कारण हम कम्प्यूटर के कुछ ही बटन दबाकर किसी भी क्षेत्र के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इस सारे ज्ञान के बावजूद, क्या अभी भी ऐसे कुछ सवाल हैं जिनके जवाब आप नहीं ढूंढ पाए हैं?
आपके अंदर ज्ञान का एक ऐसा स्रोत मौजूद है जिसे इंटरनेट पर खोजा नहीं जा सकता। वो आपके भीतर की गहराई में आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। कम्प्यूटर पर लॉग-इन करने के बजाय, आप ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने अंदरूनी सार-तत्त्व, अर्थात् आत्मा, में लॉग-इन कर सकते हैं। इससे आप ज्ञान और विवेक के एक ऐसे स्रोत के साथ जुड़ जाएँगे जो आपके जीवन को समृद्ध कर देगा।
आध्यात्मिक जागृति क्या है? शायद आप कभी अपनी आत्मा के बारे में सोचते हों, यह जानना चाहते हों कि क्या आप शरीर और मन के अलावा भी कुछ हैं। आध्यात्मिक जागृति वही क्षण होता है जब आप ख़ुद से ऐसे सवाल पूछने लगते हैं। यहीं से जवाबों को पाने की आपकी यात्रा की शुरुआत होती है।
अगर आपको ऐसा लगता है कि बाहरी ज्ञान से, चाहे वो किताबें हों या इंटरनेट, आपको जो जवाब मिल रहे हैं वो काफ़ी नहीं है, तो आप और आगे का ज्ञान पाने के लिए अपने अंतर में ध्यान टिकाने का तरीका सीख सकते हैं, जहाँ समस्त ज्ञान आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। ध्यानाभ्यास की तकनीक सीखने से आपको वो मिल सकता है जिसकी आपको तलाश है।
भीतरी आनंद के साथ जुड़ने से आंतरिक व बाहरी शांति का अनुभव
जब आप जवाबों की तलाश करते हैं और वो आपको नहीं मिलते, तो आप बेचैन या निराश हो जाते हैं। हो सकता है कि आप अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में जानना चाहते हों, यह जानना चाहते हों कि आप कौन हैं और यहाँ क्यों आए हैं। यह बेचैनी ही अक्सर आपकी आध्यात्मिक जागृति की शुरुआत होती है।
सारे जवाब पहले से ही आपके अंदर मौजूद हैं, जिन तक आप ध्यानाभ्यास की विधि द्वारा पहुँच सकते हैं। जानिए कि ध्यानाभ्यास के द्वारा आप कैसे अपने अंतर में आनंद से भरपूर शरणस्थली तक पहुँच सकते हैं, और फिर आंतरिक व बाहरी शांति तथा सदा-सदा रहने वाली ख़ुशियों को पा सकते हैं।
आध्यात्मिक विकास संबंधी इस पृष्ठ पर बार-बार आकर नए-नए लेखों और वीडियोज़ से लाभ उठाएँ, ताकि आप अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में जान सकें और ध्यानाभ्यास के द्वारा आध्यात्मिक रूप से जागृत हो सकें।
और अधिक जानना चाहेंगे?
बास्केटबॉल कौशल को ध्यानाभ्यास में इस्तेमाल करना
ध्यानाभ्यास के लिए एकाग्रता की ज़रूरत होती है। इसका अर्थ है अपने शरीर को बिल्कुल स्थिर करके बैठना, जिस तरह खिलाड़ी अपने शरीर को उस स्थिति में रखते हैं जिसमें वो बॉल को पकड़ सकें। हमें भी आंतरिक बॉल के साथ जुड़ना है, इसीलिए हमारे शरीर का स्थिर होना ज़रूरी है।
हमेशा अपनी ओर से बेहतर से बेहतर करिए
जीवन में ऐसा समय भी आता है जब अपनी ओर से बेहतरीन प्रयास करने पर भी हम परिणाम से संतुष्ट नहीं होते, या जब हमारे प्रयास उन लोगों के द्वारा ही सराहे नहीं जाते जिनकी हम सहायता करने की कोशिश कर रहे होते हैं। जब ऐसा होता है, तो हम अपने प्रयासों में सतर्क हो जाते हैं, और परिस्थितियों या लोगों के अनुसार अपने प्रयासों में बढ़ोतरी या कमी लाते रहते हैं।
लगावों को त्यागना
एक रोचक कहानी की मदद से हम जान पाते हैं कि कैसे हम अपनी इच्छाओं और दैनिक गतिविधियों के गुलाम बन जाते हैं, और इस प्रक्रिया में अपने जीवन के सच्चे उद्देश्य को पाने के लिए समय ही नहीं निकाल पाते।
सभी चीज़ों में कुछ न कुछ अच्छा ढूंढ लीजिए
हम अक्सर एक आधे-भरे गिलास को आधा-भरा हुआ नहीं, बल्कि आधा-खाली की नज़र से देखते हैं। किसी भी स्थिति को देखते समय, ज़्यादातर लोग उसके अच्छे पहलू के बजाय उसके बुरे पहलू की ओर ही देखते हैं। लेकिन, यदि हम इस बारे में ध्यान से सोचें, तो देखेंगे कि हमारे जीवन में बहुत सारी अच्छी चीज़ें भी हो रही हैं, और हमारे पास ऐसी कई देनें हैं जिनके लिए हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए।
मानवता के द्वारा जवाबों की खोज
अपने स्रोत की हमारी तलाश को, इस भौतिक सृष्टि के हमारे अनुसंधानों और अन्वेषणों में देखा जा सकता है।
आत्मा बिना शर्त सबसे प्रेम करती है
यदि हम अपनी आत्मा के संपर्क में आएँगे और दुनिया को उसकी नज़रों से देखेंगे, तो हम न केवल बिना शर्त प्रेम करने लगेंगे, बल्कि अपने लिए प्रभु के बिना शर्त प्रेम को भी महसूस कर पाएँगे।