22 जुलाई 2019

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज न्यूयॉर्क में, 20 और 21 जुलाई 2019

चाहे संयुक्त राष्ट्र संघ में व्याख्यान हो या न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा साक्षात्कार हो, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज न्यूयॉर्क के लिए अजनबी नहीं हैं। 20 और 21 जुलाई को महाराज जी एक बार फिर न्यूयॉर्क में पधारे तथा लॉन्ग आइलैंड व क्वीन्स में सत्संग फ़र्माए।

संत राजिन्दर सिंह जी के सान्निध्य में एक छोटा सप्ताहाँत बिताने के लिए भी 3000 से अधिक लोग शनिवार को ऐमिटीविल के साइंस ऑफ़ स्पिरिच्युएलिटी मेडिटेशन सेंटर में और रविवार को क्वीन्स कॉलेज में एकत्रित हुए।

20 जुलाई को ऐमिटीविल सेंटर में महाराज जी ने पहली बार हिंदी में सत्संग फ़र्माया, “आध्यात्मिक जागृति”। पूरे हॉल में चुप्पी छाई थी जब महाराज जी ने ध्यानाभ्यास के बारे में समझाया, और उसे उसकी आध्यात्मिक जड़ों तक वापस लाए, यह बताते हुए कि हमारे इस संसार में आने का मकसद है अपने आप को जानना और प्रभु को पाना। सत्संग के अंत में श्रोताओं की ज़ोरदार तालियों से हॉल गूंज उठा। इस सत्संग का अनुवाद अंग्रेज़ी और स्पैनिश, दोनों भाषाओं में किया गया।

Sant Rajinder Singh NY Seminar Benfits to meditation

सम्मान-पत्र व पुरस्कार

रविवार को क्वीन्स कॉलेज में सत्संग से पूर्व संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को, विश्व के कोने-कोने में ध्यानाभ्यास के द्वारा आंतरिक और बाहरी शांति का प्रसार करने के उनके अथक प्रयासों के लिए, फ़ेडेरेशन, राज्य, और शहर के अधिकारियों की ओर से सात सम्मान-पत्र प्रदान किए गए। इन अधिकारियों में कॉन्ग्रैसवूमैन ग्रेस मेन्ग और कॉन्ग्रैसमैन टॉम सुओज़ी शामिल थे।

गवर्नर ऐन्ड्रयू ने महाराज जी के सम्मान करते हुए कहा, “सभी न्यूयॉर्क वासियों की ओर से मैं संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की, उनके अमूल्य नेतृत्त्व के लिए और विश्व में शांति व आध्यात्मिक जागृति लाने के उनके प्रयासों के लिए, सराहना करता हूँ, तथा अपना ज्ञान व उपचार हमारे साथ साँझा करने के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ।”

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंडर सेक्रेटी-जनरल फ़ॉर ऑपरेशनल सपोर्ट, श्री अतुल खरे, ने अपने संदेश में कहा, “जिस तरह हमने बाहरी संसार में काफ़ी तरक्की कर ली है, उसी तरह हमें अंतर में अपनी आत्मा की ओर भी यात्रा करने की आवश्यकता है।”

संत राजिन्दर सिंह जी का संदेश

अपने सत्संग “अंतर की यात्रा पर जायें” की शुरुआत करते हुए महाराज जी ने न्यूयॉर्क की विविधता पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि हालाँकि कई अलग-अलग भाषाएँ हैं, लेकिन आध्यात्मिक क्षेत्र में केवल प्रेम की भाषा ही काम करती है; और जब हम प्रेम की भाषा का अनुभव कर लेते हैं, तो बाहरी भिन्नताएँ महत्त्वपूर्ण नहीं रह जातीं। जिस प्रकार हम अपने शरीर का अनुभव करते हैं, उसी प्रकार हम अपनी आत्मा का भी अनुभव कर सकते हैं, जोकि परमात्मा का अंश है। महाराज जी ने फ़र्माया कि अध्यात्म, आत्मा की परमात्मा के पास वापस जाने वाली यात्रा है।

कार्यक्रम की समाप्ति ध्यानाभ्यास के साथ हुई। पहले महाराज जी ने ध्यानाभ्यास की विधि समझाई, उसके बाद श्रोता मौन होकर अपनी आँखें बंद करके बैठ गए, तथा उस शांति का आनंद लेने लगे जो न केवल उस विशाल ऑडिटोरियम में बल्कि उनके दिलों में भी फैल गई थी।

न्यूयॉर्क से संत राजिन्दर सिंह जी महाराज शिकागो वापस लौटेंगे, जहाँ वे लाइल, इलिनोई, में साइंस ऑफ़ स्पिरिच्युएलिटी इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में सत्संग फ़र्मायेंगे।

अधिक जानकारी के लिए कृपया media@sos.org पर संपर्क करें।

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